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जीव का भाव शुद्ध हो तो परमात्मा का दर्शन दुर्लभ नहीं – आचार्य विमलेश दीक्षित

हरदोई/स्टेट ब्यूरो,(लवकुश सिंह):- हरदोई बावन के कुसमा माता मंदिर प्रांगण में शुरू हुई श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन की कथा को सुनाते हुए आचार्य बिमलेश दीक्षित ने बताया कि जीव अगर सांसारिक सहारा छोड़ दे तो प्रभु रक्षा अवश्य करते हैं पांडवों की मां कुंती ने कृष्ण भगवान से दुखों की मांग की। परमात्मा कृष्ण ने यह वरदान देने से मना कर दिया कुंती ने कहा अगर जीवन में दुख रहेगा तो आपका स्मरण होता रहेगा।

धन और संपदा आने से भजन में व्यवधान उत्पन्न हो जाता है परीक्षित के जीवन की गाथा सुनाते हुए बताया कि परीक्षित को परमात्मा ने मां के गर्भ में रक्षा करके बचाया और श्री सुखदेव को भी गर्भ में दर्शन कराया तो दोनों का तारतम्य एक दूसरे के साथ हुआ आगे की कथा सुनाते हुए आचार्य श्री ने बताया कि अगर जीव का भाव शुद्ध हो तो परमात्मा का दर्शन दुर्लभ नहीं है अपितु सुलभ है यही भाव विदूर सुलभा की गाथा से प्राणी मात्र को ग्रहण करना चाहिए कोठी चाहे कितनी महंगी हो कोई भी व्यक्ति हाथ नहीं जोड़ता मगर मंदिर छोटा भी हो तो लोग हाथ जोड़ ही लेते हैं इस वक्तव्य से व्यक्ति को यही समझना चाहिए कि जीव कीमती नहीं है अपितु उसके विचार उसकी भक्ति उसको कीमती बनाती है।

सुकदेव महाराज ने जन्म लेने के बाद भागवत कथा सुनने की इच्छा जाहिर की थी। इसके बाद भगवान ने इसका मार्ग प्रशस्त किया और कहा कि आपको भागवत कथा सुनने का मौका भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि सुकदेव महाराज एक तरह से धरती पर दूसरे लोगों का कल्याण करने के लिए ही अवतरित हुए थे। अपने जन्म में उन्होंने धर्म जागरण के लिए इतने अधिक कार्य किए कि वे पूज्यनीय हो गए। सुकदेव ने राजा जनक के यहां दीक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्हें भागवत कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस अवसर पर कथा परीक्षित दीपक त्रिवेदी ने व्यासपीठ का माल्यार्पण किया अवनीश मिश्रा ने भागवत भगवान की आरती की अन्य भक्त जनों ने कथा का आनंद प्राप्त किया।

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