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कैसे रहें एचआईवी-एड्स से सुरक्षित

संवाददाता,(दिल्ली):- (डाॅ प्रशांत पाण्डे, एसोसिएट डायरेक्टर, डिपार्टमेन्ट आॅफ ट्रांसफ्यूज़न मेडिसिन, हिस्टोकम्पेटिबिलिटी एण्ड माॅलीक्यूलर बायोलोजी, जेपी हाॅस्पिटल, नोएडा द्वारा अडवाइज़री) एड्स (एक्वायर्ड इम्युनो डेफिशिएन्सी सिन्ड्रोम) एचआईवी (ह्युमन इम्युनोडेफिशिएन्सी वायरस) के कारण होता है। इस सिन्ड्रोम में शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत कमज़ोर हो जाती है, जिससे व्यक्ति बड़ी आसानी से किसी भी संक्रमण या अन्य बीमारी की चपेट में आ जाता है। सिन्ड्रोम के बढ़ने के साथ लक्षण और गंभीर होते चले जाते हैं।
भारत दुनिया में एचआईवी के मामलों की  दृष्टि से तीसरे स्थान पर है, यहां 2.1 मिलियन लोग एचआईवी से पीड़ित हैं। 2017 में 15 से 49 आयुवर्ग के व्यस्कों में एचआईवी की दर 0.2 फीसदी थी।
2017 में संक्रमण के नए मामलों की संख्या 80,000 से बढ़कर 88,000 तक पहुंच गई और एड्स के कारण होने वाली मौतों की संख्या 62,000 से बढ़कर 69,000 तक पहुंच गई। एचआईवी से पीड़ित 79 फीसदी लोग अपनी बीमारी के बारे में जानते हैं, इनमें से 56 फीसदी मरीज़ एंटी रेट्रो वायरल इलाज – एआरटी ले रहे हैं।
भारत में एचआईवी के प्रसार का मुख्य कारण यौन संचरण है, 2017/18 में दर्ज किए गए 86 फीसदी नए मामलों में यही कारण पाया गया। भारत में तीन राज्यों मणिपुर, मिज़ोरम और नागालैण्ड में एचआईवी के सबसे ज़्यादा मामले हैं। 2010 के बाद से एचआईवी संक्रमण के नए मामलों की संख्या 46 फीसदी कम हुई और एड्स के कारण होने वाली मौतों की संख्या में 22 फीसदी की कमी आई है।
कारण
एचआईवी एक रेट्रोवायरस है जो शरीर के मुख्य अंगों को संक्रमित कर देता है, इसमें प्रतिरक्षा प्रणाली/ इम्यून सिस्टम की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है। अलग-अलग मरीज़ों में वायरस के फैलने की दर अलग होती है जो कई कारकों पर निर्भर करती है। जैसे मरीज़ की उम्र, एचआईवी से लड़ने की ताकत, स्वास्थ्यसेवाओं की उपलब्धता, शरीर में अन्य संक्रमणों की मौजूदगी, व्यक्ति की वंशागत स्थिति, एचआईवी के किसी स्ट्रेन से लड़ने की क्षमता आदि।
एचआईवी-एड्स का संचरण
रक्ताधान/ खून चढ़ानाः ड्रग्स के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सीरीज़ शेयर करने या इस्तेमाल की गई सीरीज़ के दोबारा इस्तेमाल से एचआईवी वायरस फैलता हैं
यौन संचरणः एचआईवी पीड़ित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाने (रेक्टल, जेनाईटल या ओरल म्युकस मेंब्रेन के संपर्क में आने) से एचआईवी फैलता है।
गर्भवती मां से बच्चे मेंः अगर गर्भवती मां एचआईवी से पीड़ित है तो उसके बच्चे को भी एचआईवी हो सकता है, स्तनपान कराने से भी एचआईवी मां से बच्चे में जा सकता है।
लक्षण
कुछ लोगों में एचआईवी संक्रमण के बाद कई महीनों तक बीमारी के लक्षण नहीं दिखाई देते। हालांकि 80 फीसदी मामलों में 2-6 सप्ताह के भीतर फ्लू जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। इसे एक्यूट रेट्रोवायरल सिन्ड्रोम कहा जाता है। एचआईवी संक्रमण के लक्षण हैं बुखार, ठंड लगना, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, पसीना आना (खासतौर पर रात में), ग्रंथियों का आकार बढ़ना, त्वचा पर लाल रैश, थकान, बिना किसी कारण के वज़न में कमी।
मिथक और तथ्य
हमारे समाज में एचआईवी और एड्स के बारे में कई गलत अवधारणाएं फैली हैं। कैजुअल काॅन्टेन्ट जैसे किसी को गले लगाने, हाथ मिलाने, चूमने, छींकने, छूने, टाॅयलट या टाॅवल शेयर करने से यह बीमारी नहीं फैलती।
निदान…
एचआईवी का निदान ब्लड टेस्ट स्क्रीनिंग की मदद से किया जाता है। अगर इसमें एचआईवी पाया जाए तो टेस्ट का परिणाम ‘पाॅज़िटिव’ होता है। ‘पाॅज़िटिव’ परिणाम देने से पहले खून की कई बार जांच की जाती है। एचआईवी वायरस का संक्रमण होने के बाद यह 3 सप्ताह से 6 महीने के अंदर जांच में स्पष्ट होता है। जितनी जल्दी इसका निदान हो जाए, उतना ही इलाज की संभावना अधिक होती है। एचआईवी का पता लगने पर व्यक्ति को तनाव या अवसाद होना बेहद आम है। अगर आप ऐसे लक्षणों से परेशान हैं तो तुरंत डाॅक्टर की सलाह लें।
रोकथाम…
बाॅडी फ्लूड से बचेंः किसी भी अन्य व्यक्ति के खून या अन्य बाॅडी फ्लूड से दूर रहें, अगर आप इसके संपर्क में आते हैं तो त्वचा को तुरंत अच्छी तरह धोएं। इससे संक्रमण की संभावना कम हो जाती है।
ड्रग के इन्जेक्शन और नीडल शेयर करनाः कई देशों में ड्रग्स के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सीरीज़ को शेयर करना एचआईवी फैलने का मुख्य कारण है। यह एचआईवी के अलावा हेपेटाईटिस का भी कारण हैं। हमेशा साफ, नई नीडल इस्तेमाल करें।
असुरक्षित यौन संबंधः- बिना कंडोम के यौन संबंध बनाने से एचआईवी एवं अन्य यौन संचारी रोगों के फैलने की संभावना बढ़ जाती है। गर्भावस्थाः एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला से उसके बच्चे में एचआईवी का संक्रमण हो सकता है। इसके अलावा स्तनपान कराने से भी एचआईवी का वायरस बच्चे में जा सकता है। हालांकि अगर मां उचित दवाएं ले रही है तो यह संभावना कम हो जाती है।
खून चढ़ाने/ रक्ताधान के दौरान सुरक्षा बरतनाः स्वयंसेवी रक्तदाताओं के खून की एनएटी जांच के बाद किसी को खून देना एचआईवी को फैलने से रोकने का सुरक्षित तरीका है।
दवाओं का सेवन ठीक से न करनाः एचआईवी के मामले में डाॅक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेना ज़रूरी है, अगर आप कुछ खुराकें छोड़ देते हैं यह इलाज में रूकावट आ सकती है।  इसलिए पूरी खराक लें। एचआईवी से पीड़ित लोगों को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए, नियमित रूप से व्यायाम करें, सेहतमंद आहार लें और धूम्रपान न करें तथा नियमित रूप से अपने डाॅक्टर से मिलते रहें।
देखभाल करने वाले की भूमिका…
एड्स और एचआईवी के बारे में समाज में कई गलत अवधारणाएं फैली हैं, इसके मरीज़ों को गलत नज़रों से देखा जाता है। ऐसे में एचआईवी से पीड़ित मरीज़ को समाज में अकेलेपन, अस्वीकार्यता और भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
मरीज़ की देखभाल करने वाले व्यक्ति को एड्स के बारे में जानकारी रखनी चाहिए, इससे जुड़ी गलत अवधारणाओं को जानना और समझना चाहिए। मरीज़ को अपने आप को सर्दी जुकाम से बचाने की कोशिश करनी चाहिए क्योंकि एचआईवी के कारण बीमारियों से लड़ने की ताकत कम हो जाती है और मरीज़ न्यूमोनिया का शिकार हो सकता है। देखभाल करने वाले को भी अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए ताकि आपमें मरीज़ की देखभाल के लिए पर्याप्त उर्जा बनी रहे। नियमित रूप से व्यायाम करें और आराम करें ताकि आपकी सेहत ठीक बनी रहे।

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